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Sunday, March 8, 2009

3/3 घटनाक्रम- तैरते सवाल

  • 25 मिनट तक सुरक्षा बलों और हमलावरों के बीच क्रॉस फायरिंग होती रही, लेकिन एक भी आतंकवादी न तो मरा और न ही घायल हुआ। जबकि पाकिस्तानी अधिकारियों का दावा है कि सुरक्षा में तैनात जवानों ने जवाबी कार्रवाई की।
  • घटना के फौरन बाद आसपास के इलाके को सील कर आतंकवादियों की तलाशी के लिए कोशिशें क्यों नहीं की गईं?
  • इतने लंबे वक्त तक गोलीबारी होने के बावजूद चंद कदम के फासले पर स्थित गुलबर्ग पुलिस स्टेशन से दूसरी टुकड़ी नहीं पहुंची। लिबर्टी चौराहे पर पिकेट ड्यूटी पर तैनात पुलिस वालों का भी कोई अता-पता नहीं था।
  • घटना से 24 घंटे पहले क्रिकेटरों की सुरक्षा का जिम्मा संभाल रहे कुछ वरिष्ठ और अनुभवी अधिकारियों का पंजाब के गवर्नर सलमान तहसीर ने तबादला किसके कहने पर किया?
  • जनवरी से ही श्रीलंकाई क्रिकेट टीम पर हमला हो सकने की खुफिया जानकारी पुलिस के पास थी। इस जानकारी को श्रीलंकाई सुरक्षा अधिकारियों के साथ दौर से पहले शेयर क्यों नहीं किया गया?
  • पाकिस्तान और श्रीलंका की टीम एक साथ ही स्टेडियम के लिए रवाना होती थीं, फिर हमले के दिन पाकिस्तान टीम 5 मिनट देर से क्यों रवाना की गई।
  • पाकिस्तान क्रिकेट टीम के कप्तान यूनुस खान के पास मैच से पहले किसका फोन आया था, क्या यूनुस के कहने पर ही बस को देर से रवाना किया गया?
  • बिना किसी सबूत के घटना के चंद घंटों के भीतर ही हामिद गुल और सरकारी मीडिया के कुछ हलकों में भारत के इन हमलों के पीछे होने का अंदेशा जाहिर किया गया। इस मसले पर पाकिस्तान की सरकार ने अपना रुख साफ करने में तीन दिन का वक्त क्यों लगाया?
  • श्रीलंका के स्पिनर मुरलीधरन के मुताबिक हमलावरों को हमारे प्रोग्रैम और रूट की पूरी जानकारी थी और इसमें अंदर का कोई आदमी शरीक था। फिर भी पाकिस्तानी सुरक्षा बल आयोजन से जुड़े लोगों से पूछताछ नहीं कर रही है।
  • लाहौर के पुलिस कमिश्नर के मुताबिक पुलिस की गाड़ी सिर्फ क्रिकेटरों की बस को एस्कॉर्ट करने के लिए थी। सुरक्षा के तिहरे चक्र को भूल भी जाएं तो भी क्या एक भी अदद टुकड़ी सुरक्षा के लिए तैनात नहीं की जा सकती थी?


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