ऑस्कर का मतलब तो उसे नहीं मालूम, लेकिन वह भोली सी मुस्कान के साथ कहती है, 'स्कूल में बच्चे कहते हैं, 'पिंकी अमेरिका जाना है, ऑस्कर जीतकर लाना है।' जी हाँ, ऑस्कर की चमचमाती ट्रोफी जीतने का ख्वाब लिए 8 साल की पिंकी अपने पिता राजेंद्र सोनकर और डॉक्टर सुबोध कुमार सिंह के साथ अमेरिका रवाना हो गई।
पिंकी मेगन मायलन की डॉक्युमेंट्री फिल्म 'स्माइल पिंकी' का मेन करैक्टर है, जिसे ऑस्कर पुरस्कारों के लिए डॉक्युमेंट्री फिल्म की कैटिगरी में नॉमिनेट किया गया है। 23 फरवरी को जब लॉस ऐंजिलिस के कोडक थियेटर में ऑस्कर का रंगारंग समारोह होगा, तब अपनी नन्ही पिंकी भी वहां मौजूद होगी। स्माइल पिंकी' यूपी के मिर्जापुर जिले की मासूम लड़की के इर्दगिर्द घूमती है, जिसके होंठ और तालू कटे हुए थे। आठ साल की यह मासूम बच्ची न तो हिंदी जानती है न इंग्लिश। वह सिर्फ भोजपुरी में बातें करती हैं।
'क्लैफ्ट पैलेट' की शिकार इस मासूम ग्रामीण बच्ची का इंटरनैशनल एनजीओ 'स्माइल ट्रेन' ने मुफ्त ऑपरेशन कराया। इस इंटरनैशनल एनजीओ के देश भर में 166 सेंटर हैं और 10 सालों में 'क्लैफ्ट पैलेट' के शिकार 5 लाख बच्चों का ऑपरेशन करा चुका है। अब पिंकी के होंठों पर न सिर्फ मुस्कान लौट आई है, बल्कि वह स्कूल भी जाने लगी है। पिंकी का ऑपेशन करने वाले डॉक्टर सुबोध का कहना है, 'कटे होंठों की वजह से पिंकी अपना सेल्फ कॉन्फिडंस खो चुकी थी। वह गहरे डिप्रेशन में थी, लेकिन उनमें जीने की तमन्ना थी।' 18 मार्च 2007 को हुए ऑपरेशन से पिंकी को नया चेहरा मिला। अब वह अमेरिका की उड़ान पर है। उम्मीद तो यही है कि 'स्लम डॉग मिलिनेअर' के साथ 'स्माइल पिंकी' भी ऑस्कर की ट्रोफी अपने नाम करने में कामयाब होगी और होंठों पर अट्रैक्टिव स्माइल लिए इंडिया लौटेगी।
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