Thursday, January 8, 2009

मुंहासे भी छीन सकते हैं नौकरी

एयर होस्टेसेस के लिए सिर्फ वजन को काबू में रखना ही जरूरी नहीं है। उनके चेहरे पर आए मुंहासे भी उन्हें जमीन पर उतार सकते हैं।
एक एयरलाइन अधिकारी के अनुसार अगर किसी फ्लाइट अटेंडंट के चेहरे पर तीन से अधिक मुंहासे हैं तो वह मुश्किल में पड़ सकती है या पड़ सकता है। यहां तक कि उसकी नौकरी भी जा सकती है। अधिकारी ने बताया कि मुंहासों को खत्म करने के लिए वक्त दिया जाएगा। अगर ऐसा नहीं होता है तो तीन महीने के लिए उस फ्लाइट अटेंडंट की नौकरी जा सकती है।
अधिकारी कहता है कि अगर आप अपनी त्वचा की देखभाल नहीं करते तो फ्लाइट अटेंडंट बनने का सपना न रखिए। उन्होंने कहा कि हम युवाओं को लिक्विड साबुन इस्तेमाल करने की सलाह देते हैं। लिक्विड साबुन से त्वचा अच्छी रहती है। त्वचा का रंग और बनावट दुरुस्त रहती है।
एक अन्य एयरलाइन के अधिकारी ने बताया कि शरीर का वजन व्यक्ति के कद के अनुपात में होना चाहिए। पुरुष पांच फुट छह इंच और महिलाएं पांच फुट चार इंच से कम लंबाई की नहीं होनी चाहिए। इस तरह फ्लाइट अटेंडंट को अपनी डाइट के बारे में काफी सतर्क रहना चाहिए। शरीर का वजन उनकी नौकरी से जुड़ा होता है। अटेंडंट को हर दो महीने में अपना वजन तौलना चाहिए। फ्लाइट अटेंडंट जेम्स मार्क कहते हैं कि हम कुछ भी खा सकते हैं। लेकिन अगर हम अपने खान-पान का ध्यान नहीं रखते तो इसकी भारी कीमत चुकानी पड़ती है।


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'मुंबई हमलों में पाक अफसरों का हाथ'


लंदन: प्रसिद्ध ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट अंसार बर्नी का कहना है कि जिस तरह अजमल कसब की राष्ट्रीयता के मामले अंसार बर्नीपर पाक सरकार ने भूमिका अदा की, उससे पाकिस्तान की किरकिरी हुई है। उन्होंने मांग की कि इस मामले पर गृह मंत्रालय के प्रमुख रहमान मलिक को तत्काल इस्तीफा दे देना चाहिए।
साथ ही बर्नी ने कहा कि सरकार की गंदी भूमिका यह साबित करती है कि कुछ पाकिस्तानी अधिकारी या दल निश्चित तौर पर मुंबई में हुए जघन्य अपराध में शामिल हैं। बर्नी ने कहा कि देश या विदेश में किसी पाकिस्तानी के किसी अपराध या आतंकवादी कार्रवाई में शामिल होने का यह अर्थ नहीं है कि पूरा देश ही उस मामले में लिप्त है।
पाकिस्तान के पूर्व मानवाधिकार मंत्री बर्नी ने बुधवार रात जारी एक बयान में कहा कि पहले से ही यह जाहिर था कि मुंबई हमलों में गिरफ्तार एकमात्र आतंकवादी पाकिस्तान का निवासी है। लेकिन उसकी राष्ट्रीयता को गृह मंत्रालय द्वारा स्वीकार नहीं करने से इस मामले में पाकिस्तान के सीधे शामिल होने को लेकर भ्रम की स्थिति पैदा हो गई। दुनिया के कुछ देश पाकिस्तान को शक की नजरों से देख रहे हैं। हाल में अजमल के गांव गए एक दल ने इस बात की पुष्टि की थी कि वह पाकिस्तानी नागरिक है और अब उसके माता-पिता गांव से लापता हैं।
मानवाधिकार कार्यकर्ता ने कहा कि गृह मामलों के लिए प्रधानमंत्री के सलाहकार ने अज्ञात उद्देश्यों से इस मामले को पूरी तरह गलत ढंग से पेश किया, जिससे अब पाकिस्तान के लिए और समस्याएं पैदा होंगी। पाकिस्तान ने लगातार इनकार करते रहने के बाद बुधवार को भारत की इस दलील को स्वीकार कर लिया था कि कसब पाकिस्तान का ही नागरिक है।
उन्होंने कहा कि सरकार की गंदी भूमिका यह साबित करती है कि कुछ पाकिस्तानी अधिकारी या दल निश्चित तौर पर मुंबई में हुए जघन्य अपराध में शामिल हैं। बर्नी ने भारत सरकार से आग्रह किया कि वह अजमल कसब से उन्हें मुलाकात की इजाजत दे, ताकि सच सामने आ सके, क्योंकि उसकी गिरफ्तारी भी कई तरीकों से संदिग्ध है।


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Tuesday, January 6, 2009

पाक के इनकार से कसब अनजान

मुंबई : मुंबई हमलों में गिरफ्तार आतंकवादी अजमल आमिर कसब को यह पता नहीं है कि पाकिस्तान ने उसे अपना नागरिक मानने से इनकार कर दिया है। क्राइम ब्रांच के एक अधिकारी के मुताबिक, कसब ने हमसे अपने उस खत के बारे में पूछा है, जिसमें उसने पाकिस्तान से कानूनी मदद मांगी थी। हमने उसे बताया है कि प्रक्रिया चल रही है।
कसब को पाकिस्तान में हो रही गतिविधियों की जानकारी नहीं है। वह नहीं जानता कि ठोस सबूत न होने का बहाना बनाकर पाकिस्तान ने उसे अपना नागरिक मानने से इनकार कर दिया है।
उधर जेल अधिकारियों का कहना है कि कसब को अपनी करतूत पर कोई अफसोस नहीं है। उसे भरोसा है कि उसने जो किया, ठीक किया। कसब ने पाकिस्तान को लिखे खत में कहा था कि मैं और मेरा साथी पाकिस्तानी हैं, इसलिए पाकिस्तानी उच्चायोग मेरे साथी आतंकवादी इस्माइल का शव अपनी कस्टडी में ले।


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फ़िर वही जवाब 'सबूत नाकाफी',

  • पाकिस्तान ने कहा, 'भारत की ओर से सौंपे गए सबूत अपर्याप्त'
  • कसब का बयान जबरदस्ती दिलाया गया बयान
  • पाकिस्तानी कमिटी करेगी सबूतों की 'जांच'

इस्लामाबाद : मुंबई हमलों के सिलसिले में भारत की ओर से सौंपे गए सबूत को पाकिस्तान ने अपर्याप्त बताते हुए कहा है कि इसके आधार पर कार्रवाई नहीं की जा सकती। गिरफ्तार आतंकवादी कसब के बयान को भी पाकिस्तानी अधिकारियों ने जबरदस्ती कर दिलाया गया बयान करार दिया है।

हालाँकि चौतरफा दबाव के बीच मोहलत पाने के लिए पाकिस्तान ने नया दांव खेला है। जियो टीवी के मुताबिक भारत की ओर से सौंपे गए सबूतों के आधार पर जांच करने के लिए पाकिस्तान सरकार जॉइंट कमिटी बनाएगी। हालांकि अभी यह नहीं स्पष्ट हो सका है कि जांच कमिटी का स्वरूप कैसा होगा। यह कमिटी भारत की ओर से सौंपे गए सबूत में दिए गए तथ्यों- इंटरनेट टेलिफोन नंबर और आईपी अड्रेस की जांच करेगी। बताया जा रहा है कि शुरुआती जांच करने के बाद कमिटी सरकार को आगे उठाए जाने वाले कदमों के बारे में भी सलाह देगी।

हालांकि, इससे पहले पाकिस्तानी मीडिया में कहा गया था कि भारत के सबूतों को पाकिस्तान सरकार ने अपर्याप्त बताते कार्रवाई करने से इनकार कर दिया है। पाकिस्तानी अखबार 'द नेशन' ने सरकारी सूत्रों के हवाले से कहा कि सबूत कसब के बयान पर आधारित हैं। कसब भारतीय खुफिया एजेंसियों की गिरफ्त में है और मुमकिन है कि उसे प्रताड़ित करके उसका बयान रिकॉर्ड किया गया हो, लिहाजा उसकी कोई कानूनी मान्यता नहीं है।


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'पाकिस्तानी को थी हमलों की जानकारी'


"मुंबई आतंकी हमलों की जाँच के दौरान जो चीज़ें हमारे सामने आई हैं, दस्तावेज़ के रूप में उसे पाकिस्तान को सौंप दिया गया है। हमें उम्मीद करते है कि पाकिस्तान इन दस्तावेज़ों के आधार पर जाँच करेगा, जो पाकिस्तान पर उंगली उठाते हैं। हम भरोसा करते हैं कि पाकिस्तान अपनी जाँच के नतीजे हमें बताएगा और हमें क़ानूनी मदद भी देगा ताकि हम मुंबई हमले में शामिल लोगों को भारत ला सकें।"- शिव शंकर मेनन

विदेश सचिव शिवशंकर मेनन ने दिल्ली में संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि जिस तरह मुंबई हमलों के दौरान कमांडो कार्रवाई की नौबत आई, भारत ये नहीं विश्वास कर सकता कि पाकिस्तानी सत्ता प्रतिष्ठान की जानकारी के बिना हमले संभव थे। भारत ने पाकिस्तान से मांग की है कि वह मुंबई हमलों में शामिल लोगों को भारत के हवाले कर दे ताकि भारत में उन पर क़ानूनी कार्रवाई हो सके। पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय ने मुंबई हमलों से संबंधित दस्तावेज़ मिलने की बात स्वीकार की है और कहा है कि संबंधित अधिकारी इसकी जाँच कर रहे हैं.
दूसरी ओर दक्षिण एशिया मामलों के अमरीकी सहायक विदेश मंत्री रिचर्ड बाउचर से मुलाक़ात के बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी ने कहा है कि अगर भारत की ओर से ठोस सबूत मिले तो पाकिस्तानी नागरिकों के ख़िलाफ़ भी कार्रवाई की जाएगी।

शिवशंकर मेनन ने कहा कि अब हम चाहते हैं कि पाकिस्तान बोलने की बजाए कार्रवाई करे और अभी तक यह दिखा नहीं है। विदेश सचिव का कहना था कि पाकिस्तान की ओर से सहयोग प्रत्यर्पण भी हो सकता है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत को अभी तक पाकिस्तान की ओर से कोई कार्रवाई दिखी नहीं है. शिवशंकर मेनन ने कहा कि अभी तक मुंबई हमलों की जाँच पूरी नहीं हुई है. लेकिन उन्होंने कहा कि अपराध भले ही भारत में हुआ है, लेकिन इसकी साज़िश पाकिस्तान में रची गई है। इसलिए भारत को उम्मीद है कि पाकिस्तान अपना वादा पूरा करेगा.
विदेश सचिव ने कहा कि भारत ने काबुल में भारतीय दूतावास पर हमले के सबूत भी पाकिस्तान को दिए थे, लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि पहले के रुख़ से अलग पाकिस्तान इस बार भारत को सहयोग देगा. उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय संधियों और सार्क (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) चार्टर के तहत भारत में आतंकवादी हमलों में शामिल लोगों को प्रत्यर्पित करने के लिए पाकिस्तान बाध्य है."


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