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Sunday, January 4, 2009
आतंकी ठिकानों को तबाह कर दो: कलाम
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Saturday, January 3, 2009
सबूत मिलने पर करेंगे कार्रवाई
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि यदि भारत मुंबई में आतंकी हमलों से जुडे़ सबूत उसे सौंपता है तो वह इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई अवश्य करेगा।
पाकिस्तान के स्थानीय मीडिया के अनुसार जरदारी ने यह बात पाकिस्तान में अमेरिकी राजदूत एने डब्ल्यू पीटरसन के साथ शुक्रवार को मुलाकात के दौरान कही। इस मुलाकात के बाद यहां जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि दोनों के बीच द्विपक्षीय मुद्दों के साथ ही क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर भी चर्चा हुई। राजनीति विश्लेषक इस मुलाकात को अमेरिका के भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने के संबंध में किए जा रहे प्रयासों से जोड़ रहे हैं।
स्थानीय मीडिया के अनुसार जरदारी ने कहा कि मुंबई हमले की संयुक्त जांच के पाकिस्तान के प्रस्ताव का भारत को सकारात्मक जवाब देना चाहिए तथा ऐसा नहीं होने से दोनों के बीच जारी शांति प्रयासों को धक्का लगेगा। पीटरसन और जरदारी ने पाक-अफगान सीमा क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति की समीक्षा के साथ वहां आतंकियों के खिलाफ चल रहे अभियान को और बेहतर बनाने के उपायों पर भी चर्चा की। पीटरसन ने कहा कि उनका देश भारत और पाकिस्तान के नेताओं के साथ लगातार संपर्क में है तथा वह दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए किसी भी तरह की बातचीत का समर्थन करेगा।
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Friday, January 2, 2009
आईसीसी हाल ऑफ फेम लांच

55 पूर्व खिलाड़ियों के साथ गावस्कर, कपिल व बेदी शामिल 

- आस्ट्रेलिया के पूर्व विकेटकीपर रोडने मार्श पहले हाफ ऑफ फेमर बने।
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'ताज और ओबेरॉय में आग लगाओ-आग लगाओ'
- वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल कॉल्स से मिले विवरण से खुलासा
- लश्कर-ए-तैयबा के आलाकमान जिहादियों दे रहे थे दिशा-निर्देश
- लश्कर के कमांडरों की पहचान ज़रार शाह, अबू हमज़ा और अबू काफा के रूप में
गौरतलब है लश्कर के कमांडरों की पहचान ज़रार शाह, अबू हमज़ा और अबू काफा के रूप में हुई है। हालांकि लश्कर कमांडरों ने बातचीत के जरिए अपनी पहचान छिपाने की कोशिश की थी। लेकिन अमेरिका की खुफिया एजंसी एफबीआई और दूसरी एजंसियों की मदद से भारतीय जांचकर्ताओं ने कॉल्स के डीटेल्स पता कर लिए हैं।
डीटेल्स से पता चला है कि नरीमन हाउस, ओबेरॉय और ताज होटेल में घुसे आतंकवादियों को उनके आका पल पल की जानकारी दे रहे थे। पंजाबी में बात करते हुए लश्कर आकाओं ने जिहादियों से कहा कि उन जगहों पर नजर रखें जहां से सुरक्षाकर्मी और कमांडो आ सकते हैं। उन्होंने कहा- कमांडो पर ग्रेनेड फेंको और उन पोजिशनों से हट जाओ जहां से कमांडो उन्हें निशाना बना सकते हैं। लश्कर के कमांडर आतंकवादियों से बार-बार आग लगाने के लिए कह रहे थे ताकि ज्यादा से ज्यादा जान-माल का नुकसान हो। उनके शब्द थे- 'आग लगाओ, आग लगाओ।'
पाकिस्तान में बैठे इन आकाओं ने नरीमन हाउस में घुसे आतंकवादियों से इस्राइलियों को मार डालने के लिए कहा। कॉल्स डीटेल्स से पता चला कि लश्कर लीडर्स नरीमन हाउस में एक आतंकवादी इमरान बब्बर द्वारा टीवी चैनल को दिए गए इंटरव्यू पर भी शांत नजर आए। बल्कि वह इस बात पर खुश हुए कि बब्बर ने इंटरव्यू के दौरान इंग्लिश शब्दों का भी इस्तेमाल किया।
यही नहीं लश्कर कमांडर ने दूसरे आतंकवादियों से पूछा- 'तुम भी देना चाहते हो।' जैसे ही सेना ने मोर्चा संभाला और कमांडो कार्रवाई के लिए आगे बढ़ें लश्कर कमांडर ने तुरंत आतंकवादियों को चेताया- 'फौज आ रही है, कवर लो।' लेकिन बातचीत के दौरान कहीं भी उनकी आवाज़ में चिंता नज़र नहीं आई। बल्कि वह इस बात से आश्वस्त लगे कि एनएसजी के जवानों के लिए इन आतंकवादियों को निपटाना आसान नहीं होगा।
कमांडो कार्रवाई के दौरान लश्कर कमांडर ने उन्हें खजूर खाने और आराम करने के लिए कहा। आतंकवादियों से उन्होंने कहा- 'थकना नहीं है' । आतंकवादियों के कोई भी आका इस पूरी बातचीत के दौरान कहीं भी चिंतित नजर नहीं आए। एक आतंकवादी ने जब उन्हें बताया कि वह बुरी तरह जख्मी हो गया है, तब उन्होंने बड़े ही शांत तरीके से आतंकवादी से कहा- 'आखिरी वक्त आ गया है, नमाज़ अदा करो।'
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Thursday, January 1, 2009
नाम बदलने की फिराक में जमात-उद-दावा
नई दिल्ली। पाकिस्तान के प्रतिबंधित संगठन जमात-उद-दावा के नेताओं की हाल की गतिविधियां से संकेत मिले हैं कि यह संगठन नये नाम से फिर से सक्रिय होने की फिराक में हैं। सूत्रों के मुताबिक मुंबई हमलों में लश्कर-ए-तैयबा का नाम सामने आने पर संयुक्त राष्ट्र द्वारा प्रतिबंधित किए गए लश्कर के छद्म रूप जमात-उद-दावा के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने हाल में पाकिस्तान में तहरीक-ए-हुरमत-ए-रसूल [टीएचआर] के बैनर तले एक रैली की थी।
उन्होंने बताया कि यह संभव है कि जमात अपने पुराने नाम को छोड़ कर टीएचआर का छद्मावरण ओढ़ कर अपनी गतिविधियों को संचालित करने की योजना बना रहा हो। दरअसल, अमेरिका द्वारा लश्कर पर करीब सात साल पहले प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उसने जमात-उद-दावा के नाम से अपनी गतिविधियां जारी रखी थी। वर्ष 1990 में अफगानिस्तान के कुनार प्राप्त में गठित किए गए लश्कर-ए-तैयबा का लोकतंत्र में तनिक भी विश्वास नहीं है और उसके संस्थापक सईद का कहना है कि जेहाद ही एकमात्र रास्ता है जिससे पाकिस्तान आत्मसम्मान और संपन्नता के रास्ते पर आगे बढ़ सकता है।
भारत बार-बार कहता रहा है कि जमात-उद-दावा तालीम और तथाकथित खैरात के नाम पर विभिन्न अवैध गतिविधियों में लिप्त है मगर उसके बावजूद पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय कानूनों को ताक पर रखकर उसकी तरफ से नजरें फेरे हुए हैं।
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