Sunday, December 14, 2008

मिस रूस बनीं मिस वर्ल्ड


मिस इंडिया पार्वती ओमनाकुट्टन दूसरे नंबर पर
जोहानिसबर्गः मिस इंडिया पार्वती ओमनाकुट्टन मिस वर्ल्ड 2008 प्रतियोगिता में दूसरे स्थान पर रहीं। मिस वर्ल्ड 2008 का ताज रूस की सेनिया सुखिनोवा के सिर सजा। हरदम हंसमुख सी दिखने वालीं पार्वती ने जोहानिसबर्ग में देश का नाम रोशन कर दिया। उन्हें मिस वर्ल्ड 2008 प्रतियोगिता में दूसरा स्थान मिला। वह फर्स्ट रनरअप रहीं। इस प्रतियोगिता में जीत रूस की सेनिया सुखिनोवा को मिली। मिस त्रिनिदाद टोबैगो दूसरी रनरअप रहीं। साउथ अफ्रीका के जोहानिसबर्ग में हुई इस प्रतियोगिता में 109 देशों की सुंदरियों ने भाग लिया।
मिस वर्ल्ड 2008 :
विनर्स
1. मिस रूस , सेनिया सुखिनोवा (विजेता)
2.मिस इंडिया , पार्वती ओमनाकुट्टन (फर्स्ट रनरअप)
3. मिस त्रिनिदाद व टौबैगो , ग्रैब्रियल वालकॉट
टॉप 5 में जगह बनानेवालीं अन्य प्रतियोगी
मिस अंगोला , ब्रिगिथ डॉस सेंटोस
मिस साउथ अफ्रीका , टैन्सी कोइट्जी


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'पाकिस्तान पर उड़े भारतीय फाइटर प्लेन'

पाकिस्तान ने भारत पर उसकी हवाई सीमा के अतिक्रमण का आरोप लगाते हुए रविवार को अपने सभी हवाई ठिकानों पर इमरजंसी की घोषणा कर दी। हालांकि, भारतीय एयरफोर्स ने पाकिस्तान के इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है।
चीनी समाचार एजंसी सिन्हुआ ने पाकिस्तान की सरकारी समाचार एजंसी एपीपी के हवाले से बताया कि पाकिस्तान ने यह कदम भारतीय जेट प्लेनों द्वारा उसकी वायुसीमा का अतिक्रमण करने पर उठाया। पाकिस्तानी एयरफोर्स के प्रवक्ता एयर कमोडोर हुमायुं वकार के हवाले से बताया कि शनिवार की रात इंडियन फाइटर प्लेनों ने लाहौर और पाक अधिकृत कश्मीर के आकाश से पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश किया। उन्होंने कहा कि पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने इस अतिक्रमण पर तत्काल प्रतिक्रिया दी और भारतीय प्लेनों को अपनी सीमा में वापस लौटने पर मजबूर कर दिया।
वकार ने कहा कि भारतीय विमान शनिवार रात 11.30 बजे और रविवार तड़के 13.05 बजे पाकिस्तानी सीमा में प्रवेश किया। उन्होंने माना कि ऐसा तकनीकी गड़बड़ी से भी हो सकता है, लेकिन फिर भी हम हर परिस्थिति के लिए तैयार हैं। इस बीच पाकिस्तान की सूचना मंत्री शेरी रहमान ने कहा कि भारत ने पाकिस्तान को बताया है कि ऐसा गलती से हो गया। हालांकि, भारतीय एयरफोर्स ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है। एयरफोर्स का कहना है कि पाकिस्तान भारत को बदनाम करने के लिए ऐसे आरोप लगा रहा है।


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मैं एक आतंकवादी और पाकिस्तानी हूं


मुंबई हमले में पकड़े गए आतंकवादी आजम आमिर कसाब ने पाकिस्तानी उच्चायोग को चिट्ठी लिखकर कानूनी सहायता की गुहार लगाई है। उधर एक पाकिस्तानी चैनल के मुताबिक 5 महीने पहले कसाब मां के पास जिहाद पर जाने के लिए आशीर्वाद लेने गया था।
मुंबई के जॉइंट कमिश्नर ऑफ पुलिस राकेश मारिया ने शनिवार को यहां कसाब द्वारा चिट्ठी लिखने की जानकारी पत्रकारों को दी। उन्होंने बताया कि मुंबई पुलिस ने कसाब की चिट्ठी को जरूरी कार्यवाही के लिए विदेश मंत्रालय और केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेज दिया गया है।
मारिया ने बताया कि 2 दिन पहले उर्दू में लिखी गई चिट्ठी में कसाब ने कहा है कि मैं और मेरे साथी पाकिस्तानी हैं। मैं पाकिस्तानी नागरिक और लश्कर - ए - तैयबा का सदस्य हूं। हम सबने आतंकवादी हमले में भागीदारी की। कसाब ने पाकिस्तानी हाई कमिशन से यह अनुरोध भी किया है कि एन्काउंटर के दौरान मारे गए उसके साथी इस्माइल खान के शव को हाई कमिशन अपनी कस्टडी में ले।
इस दावे के उलट दिल्ली स्थित पाकिस्तानी हाई कमिशन के प्रवक्ता ने कसाब की ऐसी कोई चिट्ठी मिलने से इनकार किया है। पाकिस्तान का यह इनकार काफी हैरत भरा है , क्योंकि कसाब के पाकिस्तानी नागरिक होने के अब तक ढेरों सबूत मिल चुके हैं। इसी कड़ी में पाकिस्तानी न्यूज चैनल जिओ टीवी की टीम ने कसाब के गांव फरीदकोट जाकर वहां के लोगों से बातचीत की। पता चला कि 5 महीने पहले ही कसाब गांव आया था। उसने घर छोड़ते वक्त अपनी मां से कहा था कि मैं ' जिहाद ' पर जा रहा हूं , इसलिए मुझे आशीर्वाद दो। इससे पहले कसाब के पिता आमिर कसाब ने भी ' डॉन न्यूज ' से बातचीत में माना था कि मीडिया में छपी तस्वीर में दिख रहा बंदूकधारी मेरा बेटा ही है।


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Saturday, December 13, 2008

बैन लागू न हुए तो कार्रवाई करेगी संरा


संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा व्यक्तियों और गुटों पर लगाए गए प्रतिबंधों की निगरानी के लिए जिम्मेदार एक अधिकारी ने कहा है कि यदि आतंकी गुटों के खिलाफ प्रतिबंधों को सही तरीके से लागू नहीं किया गया तो सुरक्षा परिषद कार्रवाई कर सकती है।
अलकायदा और तालिबान पर प्रतिबंधों की निगरानी के लिए नियुक्त समिति के समन्वयक रिचर्ड बैरेट ने जमात-उद-दावा पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद पाकिस्तान द्वारा की गई कार्रवाई की प्रशंसा की। बैरेट ने एक साक्षात्कार में कहा कि संयुक्त राष्ट्र में प्रावधान है कि यदि किसी देश ने अपनी सीमा के अंदर प्रतिबंधित गुट के खिलाफ आवश्यक कदम नहीं उठाए, तो उस देश के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
उल्लेखनीय है कि सुरक्षा परिषद के प्रतिबंधों के बाद सदस्य देशों को गुटों और व्यक्तियों की संपत्ति जब्त करना, उनकी अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर प्रतिबंध लगाना और उनके साथ हथियार के सौदों को रोकना जरूरी है। पाक खुफिया एजेंसी इंटर सर्विसेज इंटेलीजेंस [आईएसआई] के पूर्व प्रमुख हामिद गुल पर भी संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंधों की संभावना के बारे में पूछे जाने पर बैरेट ने कहा कि इस संबंध में अभी कोई प्रस्ताव नहीं आया है।


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एक डेडलाइन तय की जानी चाहिए


पुलिस ने आतंकवादी हमले में जिंदा पकड़े गए अजमल कसब के खिलाफ 11 केस दर्ज किए हैं और तकनीकी रूप से हर केस में पुलिस को अदालत से उसे 14 दिन तक हिरासत में रखने की इजाजत मिल सकती है। कुल मिलाकर 164 दिन यानी पांच महीने से भी ज्यादा।
मुंबई पुलिस कहती है कि कसब जैसे आतंकी की लंबे समय तक ट्रेनिंग हुई है और महज कुछ दिनों की पूछताछ में उससे सारी बातें नहीं उलगवाई जा सकती हैं। इसके अलावा कई अन्य सुरक्षा एजंसियां भी कसब से पूछताछ करना चाहती हैं।
सात साल पहले आज ही के दिन भारतीय संसद पर आतंकी हमला हुआ था। भारत पर हुए आतंकी हमलों में इसका कोई सानी नहीं है , मुंबई हमला भी नहीं। मुंबई में आतंकियों के निशाने पर सबसे कम सुरक्षा वाली जगहें जैसे फाइव स्टार होटेल , रेस्ट्रॉन्ट , रेलवे स्टेशन और अस्पताल थे। फिर संसद हमले के आरोपी अफजल को फांसी की सजा सुनाने में ट्रायल कोर्ट को एक साल का वक्त लगा।
इसके करीब एक साल बाद 2003 में हाई कोर्ट ने अफजल की सजा पर अपनी मोहर लगाई। डेढ़ साल बाद , अगस्त 2005 में सुप्रीम कोर्ट ने भी अफजल की फांसी के फरमान पर दस्तखत कर दिए। लेकिन अफजल अब भी फांसी के फंदे से काफी दूर है।
मुंबई पुलिस इसी बात पर अपनी पीठ ठोक रही है कि उसके पास कम से कम पांच महीने कसब को हिरासत में रखने का कारण है। कायदा तो यह कहता है कि एक शख्स जिसे दर्जनों लोगों ने 26 नवंबर की रात मुंबई में गोलियां बरसाते हुए देखा , पांच महीने के भीतर तो उसे उसके किए की सजा दे ही डालनी चाहिए। कसब का जुर्म जगजाहिर है। वह एक ऐसे समूह का सदस्य था जिसने भारत की धरती पर भारत के खिलाफ जंग का ऐलान किया। 26 नवंबर की रात से अब तक एक पखवाड़े से भी ज्यादा वक्त बीत चुका है लेकिन उसके खिलाफ चार्जशीट तक नहीं दाखिल की गई है। अब पांच महीने पूछताछ ही चलेगी तो केस कब चलेगा ?
हमारा रेस्पॉन्स किसी घटना की गंभीरता या भयावहता के लिहाज से बदलता ही नहीं है। हम तो एक लीक पर चलते हैं। मुकदमा चलेगा , सजा होगी , फिर हाई कोर्ट में अपील , उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में जिरह। वहां से भी फांसी की सजा हो जाए तो राष्ट्रपति के पास वीटो है। राष्ट्रपति भी मोहर लगा दे तो सरकार के पास फाइल लटकाने का अधिकार तो है ही... जब देश पर हमला हुआ है तो सुनवाई सीधे सुप्रीम कोर्ट में ही क्यों न करवाई जाए ?
भारत में किसी भी नागरिक को , उसके मूल अधिकार का हनन होने पर सीधे सुप्रीम कोर्ट में अपील करने की सहूलियत है. vastav mein एक डेडलाइन तय की जानी चाहिए जिसके भीतर फैसला हो जाए।
आतंकवाद के खिलाफ नाकाम रहने की जिस तरह की छवि हमारी बनती जा रही है , उसे बदलना होगा। यह पाकिस्तान पर हमला या बमबारी करने से नहीं होगा बल्कि देश के भीतर पहले से मौजूद सिस्टम्स को सुचारू बनाने से होगा। अजमल कसब का जिंदा पकड़ा जाना हमारे लिए एक टेस्ट केस है। इस बार हमें खुद को साबित करना होगा।


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